गुरुवार, 11 अगस्त 2016

नियंत्रण

अन-अपेक्षित कार्यों में सम्मलित होने से व्यक्ति पापकृतों का कर्ता बनता है । इसे गुरू वर्जित बताये हैं । आत्मा की इस वृत्ति पर अंकुश करना नियंत्रण है । नियंत्रण को दो भागो में विभाजित करके अपनाने से प्रभावी परिणाम मिलते हैं । यह विभाजन जनित होने वाले फल के प्रभाव स्थल बाह्य अथवा आंतरिक पर आधारित किया जाना चाहिये ।

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