भगवद्गीता
बुधवार, 24 अगस्त 2016
यश
कोई सत्कर्म जिसे समाज उत्तम कर्म मानते हुये सराहना करता है । ऐसे कर्म को
,
उसके कर्ता व्यक्ति के संदर्भ में
,
सम्मानजनक भाव में वर्णन किया जाता है । यह स्थिति उस कर्ता व्यक्ति का यश कही जाती है ।
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