गुरू ने उपदेश किया है कि किसी भी व्यक्ति के जीवन में सृजित
होने वाली समस्त स्थितियाँ यथा बुद्धि,
विवेक, भ्रम से स्वतंत्रता, धैर्य, सत्य, बाह्य तथा आंतरिक नियंत्रण, सुखांभूति तथा दु:खानुभूति, अस्तित्व तथा अनस्तित्व, भय और भय से मुक्ति, अहिंसा, समता का भाव, संतोष, संयम,
दान, यश और अपयश इन समस्त का उद्भव ब्रम्ह से
होता है ।
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