भगवद्गीता
सोमवार, 8 अगस्त 2016
भ्रम से मुक्ति
विवेक के प्रभाव से यदि कंचिद व्यक्ति अपने को प्रकृतीय मोंह की ओर प्रवृत्त होने से रोकने में सफल होता है तो फलत: वह भ्रम की स्थिति से स्वतंत्रता की स्थिति को प्राप्त होगा । मोंह से बंधन सृजित होता है । मोंह से मुक्ति स्वतंत्रता है ।
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