भगवद्गीता
गुरुवार, 25 अगस्त 2016
अपयश
किसी व्यक्ति के द्वारा कृत किसी निन्दनीय कर्म की समाज भर्तसना करता है । उस कृति कर्म के प्रभाव से वह व्यक्ति समाज द्वारा हेय दृष्टि से देखा जाता है । यह स्थिति उस व्यक्ति का अपयश है ।
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