प्रकृतीय मोंह की ओर अग्रसर होना यह सहज़ प्रवृत्ति होती है ।
परंतु उचित के चुनाव द्वारा इस सहज़ वृत्ति को अंकुश करना यह विवेक है । प्रकृतीय
मोंह अज्ञान है । इस मोंह की ओर प्रवृत्त होना आसक्ति है । इससे पाप कर्मों की ओर
व्यक्ति अग्रसर होता है । विवेक के प्रभाव से ही अज्ञान से मुक्ति मिलती है ।
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