समस्त पापकृतों का जन्म अज्ञान से होता है । असत्य प्रकृति में
सत्य का आभास अज्ञान है । इसीलिये विवेक का विषेस महत्व होता है । विवेक जो कि
सत्य ब्रम्ह और असत्य प्रकृति के भेद को प्रतिपल स्पष्ट विभक्त विदित रखे ।
तत्फलम् असत्यप्रकृति के प्रति मोंहासक्ति से व्यक्ति बचा रह सकेगा । मोंहासक्ति
से बचना और अज्ञान से बचना एक दूसरे के पर्याय हैं ।
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