बाह्य परिस्थितियों के प्रभाव से उत्पन्न होने वाले मानसिक
विक्षेपों को बर्दाश्त करने की सहन शक्ति को धैर्य कहा जाता है । बाह्य
परिस्थितियाँ हर्ष अथवा विषाद दोनो ही प्रकार के विक्षेपों की कारक हो सकती है ।
यह दोनो के लिये ही प्रभावि माप है । परिस्थितियों के प्रभाव की प्रतिक्रिया से
उत्पन्न होने वाले विचलन की सहन सीमा है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें