भगवद्गीता
सोमवार, 15 अगस्त 2016
अस्तित्व
आत्मा कंचिद अपने को एक भिन्न अस्तित्व के रूप में बोध करे तो इसे ही अहंकार कहा जाता है । कर्मो का प्रेरक ब्रम्ह है । आत्मा मात्र एक ब्रम्ह का प्रतिनिधि स्वरूप है । अहंकार बोध को ज्ञान के जिज्ञासु के लिये वर्जित बताया गया है ।
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