शनिवार, 24 सितंबर 2016

जिज्ञासा : चरण 5

चरण 4 से क्रमश: । हे परम पिता हे समस्त रूपों के जनक हे देवों के देवता हे सृष्टि के सृजनकर्ता हे समस्त ब्रम्हाण्ड के स्वामी आप ही अपने ज्ञाता हैं और अन्य दूसरा कोई भी नहीं जो आपको जान सका है । व्याख्या –चरण 4 में वर्णित स्थिति के द्वारा अर्जित मनोबल द्वारा अर्जुन कहता है कि वे समस्त ऋषि जिन्हे आपकी अनुभूति मिली वे ब्रम्ह की दशा को प्राप्त हो गये इस प्रकार प्रभु आपही अपने ज्ञाता हो अन्य कोई दूसरा नहीं । 

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