भगवद्गीता
मंगलवार, 27 सितंबर 2016
जिज्ञासा : चरण 8
चरण 7 से क्रमश: । हे जनार्दन हे प्रभू कृपया करके मुझे अपने को इन रूपों में प्रगट करने की क्षमता को विस्तार से इस प्रकार समझाइये कि मैं अज्ञानी उसको ग्रहण कर सकूँ । मुझे आपकी अमृत वाणी सुनते हुये अभी पूर्ण तृप्ति नहीं हुई है ।
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