गुरू ने ज्ञान प्राप्ति की पूरी श्रँखला को उपदेश
द्वारा बताया है । भक्ति का स्वरूप क्या है । भक्ति का सही पथ क्या है । भक्ति की
यात्रा किन किन स्थलो से गतिमान होते गंतव्य ज्ञान तक कैसे पहुँचती है । भक्ति को
सत्य स्वरूप में स्थापित हो जाने पर ब्रम्ह अपनी अनुकम्पा द्वारा भक्त को अज्ञान
के जाल से स्वयं बाहर निकालते हैं ।
अज्ञान का क्षय होना ही ज्ञान का उदय है ।
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