व्यक्ति का आधार उसकी आत्मा । प्रथम तो अपने स्वरूप को अनुभव
करे पुन: समस्त फैली हुई वैभव ब्रम्ह से उत्पन्न ही का अनुभव करा सके । यह अनुभूति
के चरण हैं । एक उपलब्धि के बाद दूसरी । क्रमबद्ध अनुभूति । इन्ही अनुभूतियों
द्वारा व्यक्ति पूर्णरूप से ब्रम्ह से अनुभूति कर सकेगा ।
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