गुरू के उपदेश ब्रम्ह समाहित दशा, तक कैसे चरणों में प्रगति करते हुये पहुँचा
जाय, के लिये पथ बताते हैं । आत्मा
प्रधान जीवन । इस आत्मा प्रधान जीवन के द्वारा शरीर की रचना में प्रयुक्त निम्नतर
प्रकृति को आत्ममय के स्तर तक उन्नति । इस स्थिति के फल से उत्पन्न उत्कृष्ठ मानसिक क्षमता । इस उत्कृष्ठ क्षमता के मस्तिष्क द्वारा ब्रम्ह के अनुभूति की
स्थिति ।
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