शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

अनुकम्पा

सत्यनिष्ठ संत को ब्रम्ह से मिलने वाली अनुकम्पा की गणना को आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि मैं उन संतो के लिये, जो सतत मेरी ही प्रकृति में रहते हैं, अपनी अनुकम्पा द्वारा उनके अज्ञान को पूर्णतया नाश कर देता हूँ, जिसके फल से उन्हे ज्ञान के दर्शन हो जाते हैं । 

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