रविवार, 4 सितंबर 2016

अनुभूति से ही युति

व्यक्ति का आधार उसकी आत्मा । प्रथम तो अपने स्वरूप को अनुभव करे पुन: समस्त फै हुले हुये वैभव ब्रम्ह से उत्पन्न हुये का अनुभव करा सके । यह अनुभूति के चरण हैं । एक उपलब्धि के बाद दूसरी । क्रमबद्ध अनुभूति । इन्ही अनुभूतियों द्वारा व्यक्ति पूर्णरूप से ब्रम्ह की अनुभूति कर सकेगा| 

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