चरण 5 से क्रमश: । कृपया करके मुझे
अपने दिव्य स्वरूप का वह रहस्य बताइये जिसके द्वारा आप समस्त समस्त रूप संसार के
सृजनकर्ता होते हुये भी सभी से अछूते हैं और भिन्न हैं । व्याख्या चरण 5 में
वर्णित स्थिति को और आगे स्पष्ट करते हुये अर्जुन अपनी मौलिक जिज्ञासा कि प्रभु आप
प्रत्येक रूप को अपनी प्रकृति प्रदान कर प्रत्येक रूप का आधार हो फिरभी आप किसी
रूप में नहीं हो प्रभू को बताने की कृपा करो प्रभू ।
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