शुक्रवार, 9 सितंबर 2016

ब्रम्ह सर्वस्य

गुरू ने उपदेश किया कि ज्ञेय ब्रम्ह और उसकी महिमा इतनी व्यापक है कि जो व्यक्ति अपने मस्तिष्क में सत्य निष्ठा स्थापित कर तथा हृदय में उसके प्रति अतिआदर भाव धारण कर उसका पूजन, ध्यान, भजन, चिंतन, परिचर्चा में संलग्न रहता है उसे उसी में इतना आकर्षण और रस मिलता है कि फिर वह पूर्णतया उसी का हो जाता है ।

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