सही मानसिक धारणा में स्थापित होकर ब्रम्ह
को पूजने वाले संतो की उपलब्धि को बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को
बताये कि जो संत मुझे सतत समर्पित श्रद्धा के साथ पूजता है उसे मैं ऐसी मानसिक
ग्राह्य शक्ति देता हूँ जिसके द्वारा उसे मेरी अनुभूति मिल जाती है ।
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