शनिवार, 11 फ़रवरी 2017

अर्जुन की अभिव्यक्ति : चरण 11

दिव्य स्वरूप के वृतांत को आगे व्यक्त करते हुये अर्जुन कहता है कि हे कृपामूर्ति हे देवों के देव हे इस रूप संसार के आधार मैं आपके मुख के हाथीदाँत सदृष्य दाँतो और उसके अंदर धधकती समय की अग्नि ज्वाला को देखकर अति अचम्भित, भयभीत हूँ तथा अपने नियंत्रण को खो चुका हूँ| 

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