दिव्य स्वरूप के वृतांत को आगे
व्यक्त करते हुये अर्जुन कहता है कि हे देवो के देव आपके इस विशाल दिव्य रूप के
दर्शन, जो कि असंख्य मुखो एवँ आँखो से
युक्त है असंख्य हाथ जो कि शक्तिशाली अस्त्रों से युक्त हैं असंख्य जँघे और पैरो
से युक्त है जिसमें असंख्य पेट हैं,
से मैं और यह पूरा संसार भय से थरथरा रहा है ।
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