सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

अभिव्यक्ति का चर्मोत्कर्ष

दिव्य स्वरूप के वृतांत को व्यक्त करते करते अर्जुन जैसे थक सा गया और परम्ब्रम्हस्वरूप योगेश्वर श्रीकृष्ण से याचना भाव से कहने लगा कि हे करुणाधाम महाप्रभु दया करिये मैं पूर्णतया हत्प्रद दशा में हो गया हूँ और कृपा पूर्वक मुझे अपने इस दिव्य रूप के मूल तत्व का ज्ञान बोध कराने की महती कृपा करें । 

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