भगवद्गीता
बुधवार, 15 फ़रवरी 2017
अर्जुन की अभिव्यक्ति : चरण 15
दिव्य स्वरूप के वृतांत को आगे व्यक्त करते हुये अर्जुन कहता है कि जिस प्रकार एक पतंगा अपने को नष्ट करने के लिये अग्नि में तीव्र गति से प्रवेश करता है उसी प्रकार ये जीव तीव्र गति से समाप्त हो जाने के लिये आपके मुख में प्रवेष कर रहे हैं ।
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