इस रूप संसार के समस्त नियंत्रण काल
के अधीन हैं । कर्म एवं कर्मफल का नियम ब्रम्ह का अ-परिवर्तनीय अंकुश है । आज़ जो
कुछ भी घटित हो रहा है वह विगत समय के कर्म के फल के रूप में है । इसलिये आज़ के हो
रहे घटित को आज़ का कर्म प्रभावित नहीं कर सकता है । कुछ लोग इस आज़ के घटित हो रहे
को “ईश्वर के संकल्प” की संज्ञा देते हैं तो दूसरे कुछ लोग इसे प्रकृति का पूर्व निर्धारित
क्रम बताते हैं परंतु गुरू के उपदेश जैसा कि श्रीमद्भागवद्गीता में वर्णित है के
अनुसार ”काल” सृजन और विनाश दोनो का
नियंत्रक है और समस्त आज़ के घटित पूर्व समय में किये गये कर्म के फल हैं ।
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