भगवद्गीता
रविवार, 19 फ़रवरी 2017
अर्जुन की अभिव्यक्ति : चरण 16
दिव्य स्वरूप के वृतांत को आगे व्यक्त करते हुये अर्जुन कहता है कि हे विष्णुरूप स्वामी समस्त संसार के जीव आपके मुख में धधकती अग्नि मे प्रवेष करते भस्म होते समाप्त हो रहे हैं और मुख की अग्नि से विकरित होते ताप से बाहर के भी सभी जीव झुलस रहे हैं ।
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