दिव्य स्वरूप के वृतांत को आगे
व्यक्त करते हुये अर्जुन कहता है कि हे प्रभु आप अक्षर हैं आप ही सर्वोच्च ज्ञेय
हो आप ही समस्त रूप संसार के आधार एवं संरक्षक हो हे प्रभु आप ही परम् सत्य हो और
सम्पूर्ण रूप संसार के रक्षक हो हे प्रभु आप ही प्रथम पुरुष हो ऐसा मैं देख रहा
हूँ और अनुभव कर रहा हूँ ।
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