बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

अर्जुन की अभिव्यक्ति :चरण 8

दिव्य स्वरूप के वृतांत को आगे व्यक्त करते हुये अर्जुन कहता है कि समस्त रूद्रगण, आदित्य, वसुओं, दोनो अश्विन, मरुत, और गंधर्व यक्ष और असुर, सभी आपके दिव्य रूप में समाहित तथा अचम्भित दशा में विद्यमान हैं ।

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