भगवद्गीता
रविवार, 14 मई 2017
दूर-भी निकट-भी
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण ब्रम्ह के विषय में अर्जुन को बताये कि वह सभी प्राणियों के बाहर है और अंदर भी है । वह अचल भी है और चलायमान भी है । वह इतना सूक्ष्म है कि उसे जाना नहीं जा सकता है । वह दूर है फिर
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भी पास है ।
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