भगवद्गीता
बुधवार, 24 मई 2017
यथा स्वरूप
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो व्यक्ति आत्मा
,
प्रकृति और गुणों को उनके यथास्वरूप जानता है वह व्यक्ति यद्यपि कि प्रत्येक कार्य करता है परंतु वह पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाता है ।
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