बुधवार, 31 मई 2017

सर्वोच्च उपलब्धि

सभी रूपों में ब्रम्ह को विद्यमान देखने वाले व्यक्ति के सम्बंध में गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि क्योंकि वह व्यक्ति प्रत्येक रूप में ब्रम्ह को समानरूप से विद्यमान देखता है इसके फल से वह अपनी अहंकार स्वरूप आत्मा द्वारा अपनी सत्य आत्मा को आहत नहीं करता है और सर्वोच्च उपलब्धि को प्राप्त हो जाता है ।    

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें