मंगलवार, 9 मई 2017

एक मात्र विषय

ब्रम्ह विषय है, इस रूप संसार के समस्त रूप एवं गति उसके अनुभव की वस्तु हैं । वह सबसे श्रेष्ठ एवं भिन्न भी है और सभी में समाहित भी है । उसकी चेतना से ही समस्त अनुभव ग्राह्य होते हैं । सभी से अछूता है । वह दृष्टा है । अन्य सभी कुछ दृष्य मात्र हैं । उसे शब्दो से व्यक्त नहीं किया जा सकता है । 

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