ब्रम्ह विषय है, इस रूप संसार के समस्त रूप एवं गति उसके
अनुभव की वस्तु हैं । वह सबसे श्रेष्ठ एवं भिन्न भी है और सभी में समाहित भी है ।
उसकी चेतना से ही समस्त अनुभव ग्राह्य होते हैं । सभी से अछूता है । वह दृष्टा है
। अन्य सभी कुछ दृष्य मात्र हैं । उसे शब्दो से व्यक्त नहीं किया जा सकता है ।
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