भगवद्गीता
शनिवार, 20 मई 2017
निमित्त व फल
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि कर्मफल
,
शरीर एवं अहंकार का सृजन प्रकृति से होता है जबकि सुख और दु:ख की अनुभूति का सृजन आत्मा का अनात्मन के साथ मोंह से सृजित होता है ।
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