वह शाश्वत् सत्ता इस रूप संसार के
समस्त अस्तित्वों तथा अन-अस्तित्वों के द्वैतों से परे है जिसका न ही प्रारम्भ है
न ही अंत है । कंचिद यदि व्यक्ति इसकी अनुभूति कर सके तो उसे जीवन और मृत्यु मात्र
एक घटना स्वरूप प्रतीत होने लगेगे वह अज़र स्वरूप में जीवनयापन करेगा । यह आत्मा
वही शाश्वत् स्वरूप हैं ।
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