सोमवार, 15 मई 2017

अविभाज्य विभाजित

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण ब्रम्ह के विषय में अर्जुन को बताये कि वह अविभाज्य है, फिर भी प्राणियों में विभाजित प्रतीत होता है । ऐसा जानना चाहिये कि, वह सभी का पोषण कर्ता है, उनका बिलय भी उसी में होता है और पुन: उन्हे नये सिरे से पैदा करता है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें