भगवद्गीता
मंगलवार, 30 मई 2017
सर्वव्यापी
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो व्यक्ति प्रत्येक रूपों में ब्रम्ह को विद्यमान देखता है और उन रूपों के नष्ट हो जाने पर भी उसे न नष्ट हुआ विद्यमान देखता है
,
वह सत्य को देखता है और इसके फल से वह स्वयँ सर्वभौम बन जाता है ।
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