सभी जीवित रूपों की माता प्रकृति है
और पिता परमात्मा है । क्योंकि प्रकृति भी परमात्मा की ही एक प्रकृति (स्वभाव) है, इसलिये परमात्मा विश्व का पिता और माता
दोनो ही है । ब्रम्ह इस संसार का वीर्यरूप कारण है । उसके इन उत्पत्तियों द्वारा
ही संसार में समस्त काम चलता रहता है । जहाँ परमात्मा एक अर्थ में इस मानवीय
प्रकृति के लिये अनुभवातीत है वहाँ आत्मा के रूप में ब्रम्ह की प्रत्यक्ष
अभिव्यक्ति भी है ।
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