सत्वगुण शुद्ध होने के कारण
अपेक्षाकृत उत्तम इच्छाओं को जन्म देता है । बंधन इच्छाजनित कार्यों के करने से
उत्पन्न होता है । इसलिये सत्व किसी भी भाँति मुक्तिदायक नहीं होता है । इसके फल
से उत्तम परिस्थितियों का जीवन मिलेगा परंतु मुक्ति नहीं । मुक्ति के लिये
अहंकारशून्य की दशा ही एक मात्र पथ है ।
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