भगवद्गीता
गुरुवार, 22 जून 2017
तमस् के फल
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि तमस् की उत्पत्ति अज्ञान से होती है और यह सभी जीवधारियों को छलती है । हे भरत (अर्जुन) यह व्यक्ति को लापरवाही
,
आलस्य और निद्रा के आगोश में बाँधती है ।
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