गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को
बताये कि व्यक्ति जब रज़ोगुण प्रधान हो,
उस समय यदि विलय को प्राप्त होता है तो उसकी आत्मा कर्मों में आसक्त लोगो के मध्य
जन्म लेती है, और यदि उसका विलय तब हो, जबकि तमोंगुण प्रधान हों, तब वह मूढ योनियों में जन्म लेती है ।
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