गुण प्रकृति की प्रवृत्तियाँ हैं ।
सत्व – चैतन्य का प्रकाश है, रज़स – बाह्य उन्मुख गति की
प्रवृत्ति है, तमस – जडता, प्रमाद है । प्रकृति के सृजन का आधार है ।
इनके ही प्रभाव के फल से,
प्रकृति बन्धनकारी है, आत्मा जीवन और मृत्यु के चक्र में बधाँ
अनवरत यात्रा करता है । इनकी उत्पत्ति क्षेत्रों के ज्ञाता के स्वभाव से है ।
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