शुक्रवार, 2 जून 2017

अकर्ता साक्षी

अद्वैत वेदांत प्रशस्थ करता है कि आत्मा मात्र साक्षी होती है । कर्मों की कर्ता प्रकृति होती है । कर्म से मस्तिष्क और विवेक प्रभावित होते हैं । आत्मा प्रत्येक भाँति कर्मों की दृष्टा है । आदिशंकर का मत है कि आत्मा में किसी भी गुण का कोई साक्ष्य सम्भव नहीं हो सकता है । आत्मा निष्कलंक स्वयं प्रकाशित अद्वितीय चिर आनंद स्वरूप होती है ।  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें