शुक्रवार, 9 जून 2017

मुक्त दशा

शाश्वत जीवन आत्मा को ब्रम्ह में विलीन होने की स्थिति नहीं है अपितु आत्मा जो की प्रकृतीय मोंह में आसक्त स्थिति में है उसे स्वतंत्र ब्रम्ह स्वरूप की स्थिति में स्थापित होकर प्रकृतीय मोंह से मुक्त होने की दशा है । इस दशा को प्राप्त होने पर आत्मा संसार के व्यवहारिक सुख और त्रास की स्थितियों से ऊपर उठकर अविरल आनंद की स्थिति को भोग करता है । वह स्वयं आनंद स्वरूप है । 

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