गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से
बताये कि जो व्यक्ति अपनी ज्ञान चक्षुओं से क्षेत्र और क्षेत्र के ज्ञाता के मध्य
भेद को आत्मसात कर और सभी प्राणियों के प्रकृति से मुक्त हो जाने को जान लेता है, वह सर्वोच्च ब्रम्ह को प्राप्त हो जाता है
।
इस प्रकार “क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ
के भेद का योग” नामक तेरहवाँ अध्याय पूर्ण हुआ
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