मंगलवार, 6 जून 2017

अनात्मन से अनासक्ति

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से बताये कि जो व्यक्ति अपनी ज्ञान चक्षुओं से क्षेत्र और क्षेत्र के ज्ञाता के मध्य भेद को आत्मसात कर और सभी प्राणियों के प्रकृति से मुक्त हो जाने को जान लेता है, वह सर्वोच्च ब्रम्ह को प्राप्त हो जाता है ।

इस प्रकार “क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के भेद का योग” नामक तेरहवाँ अध्याय पूर्ण हुआ 

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