भगवद्गीता
शुक्रवार, 23 जून 2017
आनंद कर्म प्रमाद
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से बोले हे भारत (अर्जुन) व्यक्ति को सत्व आनंद से
,
रज़स् कर्म से और तमस् ज्ञान को ढककर प्रमाद से बाँधता है ।
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