भगवद्गीता
शनिवार, 16 सितंबर 2017
राजसिक यज्ञ
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से बोले कि परंतु हे भरतो में श्रेष्ठ (अर्जुन)
,
जो यज्ञ फल की कामना से या प्रदर्शन के लिये किया जाता है
,
तू समझ ले कि वह राजसिक है ।
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