भगवद्गीता
गुरुवार, 21 सितंबर 2017
सात्विक तप
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि यदि तीन प्रकार के तप (शरीर का तप
,
वाणी का तप
,
मानसिक तप) को संतुलित मन वाले व्यक्तियों द्वारा फल की इच्छा रखे बिना
,
पूर्ण श्रद्धा के साथ किया जाय
,
तो वह सात्विक तप कहलाता है ।
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