भगवद्गीता
शुक्रवार, 29 सितंबर 2017
तत्
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुनको बताया कि “तत्” शब्द का उच्चारण करके यज्ञ और तप और दान की विविध क्रियाँए प्रतिफल की इच्छा रखे बिना मोक्ष की इच्छा रखने वाले लोगों द्वारा की जाती हैं ।
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