भगवद्गीता
शनिवार, 30 सितंबर 2017
सत्
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि “सत्” शब्द का प्रयोग वास्तविकता और अच्छाई के अर्थ में किया जाता है
,
और हे पार्थ (अर्जुन)
,
“सत्” शब्द का प्रयोग प्रशासनिक कार्य के लिये भी किया जाता है ।
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