भगवद्गीता
मंगलवार, 26 सितंबर 2017
तामसिक दान
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो दान गलत स्थान पर या गलत समय पर या अयोग्य व्यक्ति को बिना किसी धर्म क्रिया के द्वारा अपमान
-
पूर्वक किया जाता है
,
उसे तामसिक दान माना जाता है ।
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