भगवद्गीता
मंगलवार, 19 सितंबर 2017
वाणी का तप
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुनको बताये कि ऐसे शब्दों को बोलना
,
जो दूसरों को बुरे ना लगे
,
जो सत्य हों
,
जो प्रिय हों
,
जो हितकारी हों और नियमित रूप से वेदों का पाठ ----- यह वाणी का तप कहलाता है ।
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